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भाखड़ा बांध में पानी की आवक 50% घटी

Punjab ujala news : पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कई राज्यों की सिंचाई, पेयजल और बिजली आपूर्ति का प्रमुख स्रोत भाखड़ा बांध इस बार पीक गर्मी के मौसम में पानी की कम आवक से जूझ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार बांध में पानी का प्रवाह सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ों में सामान्य से कम बर्फबारी और लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फ देर से पिघल रही है, जिससे सतलुज नदी के जरिए भाखड़ा बांध तक अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंच पा रहा। 11 जून को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भाखड़ा बांध में 16,527 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 32,706 क्यूसेक है। पिछले वर्ष इसी दिन बांध में 28,015 क्यूसेक पानी पहुंचा था। यानी इस बार पिछले साल की तुलना में भी जलप्रवाह काफी कम रहा।

21 मई से अब तक पानी की आमद
21 मई से 11 जून के बीच भाखड़ा बांध में कुल 3,03,307 क्यूसेक पानी पहुंचा, जबकि इसी अवधि का सामान्य औसत 5,91,876 क्यूसेक है। जल मात्रा के हिसाब से इस दौरान बांध में 0.74 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी आया, जबकि सामान्य तौर पर यह 1.45 BCM रहता है।

कम बर्फबारी और पश्चिमी विक्षोभ बना कारण
जल संसाधन विशेषज्ञों के मुताबिक, सतलुज जलग्रहण क्षेत्र में इस बार सामान्य 4 BCM की तुलना में केवल 2.2 BCM बर्फबारी हुई। इसके अलावा, लगातार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहने से ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान सामान्य से कम बना रहा, जिससे बर्फ के पिघलने की प्रक्रिया धीमी हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में तापमान करीब 4 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है, जबकि बर्फ के तेजी से पिघलने के लिए तापमान 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचना जरूरी होता है।

21 जून के बाद राहत मिलने की उम्मीद
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है। हालांकि 21 जून के बाद तापमान बढ़ने की संभावना है, जिससे बर्फ तेजी से पिघलेगी और सतलुज नदी के जलप्रवाह में सुधार होने के साथ भाखड़ा बांध में पानी की आवक बढ़ सकती है।