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बदलते मौसम के मिजाज ने बढ़ाईं स्वास्थ्य चुनौतियां

Punjab ujala news : मालवा क्षेत्र के महत्वपूर्ण जिले बरनाला में पिछले कुछ दिनों से मौसम में आ रहे अचानक बदलाव ने जन-जीवन के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी बड़ा प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। दिन के समय तेज धूप और रात में महसूस हो रही हल्की ठंड के कारण जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में आ रहा यह उतार-चढ़ाव वायरल इन्फैक्शन, गले की खराश और पेट की बीमारियों के लिए जिम्मेदार है।

वायरल बुखार और गले की बीमारियों में वृद्धि

ई.एन.टी. स्पेशलिस्ट डॉक्टर गौरव ग्रोवर ने बताया कि ओ.पी.डी. में रोजाना आने वाले मरीजों में से बड़ी संख्या गले के संक्रमण और तेज बुखार से पीड़ित है। बदलते मौसम के दौरान हवा में नमी और तापमान का संतुलन बिगड़ने के कारण वायरस तेजी से फैलता है।

गले की सुरक्षा : डॉक्टर ग्रोवर ने सलाह दी है कि इस मौसम में बहुत अधिक ठंडा पानी या आइसक्रीम खाने से परहेज किया जाए। गले में खराश होने की स्थिति में गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करना सबसे उत्तम इलाज है।

आवाज पर प्रभाव: यदि गले का संक्रमण बढ़ जाए तो यह स्वर तंत्रियों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे आवाज बैठने की समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

खान-पान में बरतें सख्त सावधानी

शहर के नामी मैडीकल विशेषज्ञ डॉक्टर मनप्रीत सिद्धू ने ‘ताजा खाओ, तंदुरुस्त रहो’ का नारा देते हुए लोगों को बाहरी खाने से दूर रहने की अपील की है।

बासी खाने से परहेज: बढ़ते तापमान के कारण पका हुआ भोजन जल्दी खराब हो जाता है। बासी खाना खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं।

स्ट्रीट फूड से दूरी: बाजारों में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों पर धूल-मिट्टी और मक्खियों के कारण इन्फैक्शन का खतरा सबसे अधिक होता है। खासकर बरनाला के मुख्य बाजारों और रेलवे स्टेशन के आस-पास बिकने वाली कटी हुई सब्जियों और फलों से बचना चाहिए। पानी का उपयोग: पानी हमेशा उबालकर पीना चाहिए। पेट की 80 फीसदी बीमारियां दूषित पानी के कारण होती हैं।