Advertisement Policy को किया हाईजैक
Punjab ujala news : पंजाब के शहरों में विज्ञापन माफिया पिछले कई वर्षों से हावी है। सरकारी रैवेन्यू को भारी चपत लगाकर प्राइवेट जेबें भरने का यह खेल लगातार जारी है। इस समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से 2017 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उस समय के लोकल बॉडीज मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने 2018 में एक नई एडवर्टाइजमैंट पॉलिसी तैयार की थी, जिसे पूरे राज्य में लागू भी कर दिया गया। सिद्धू ने दावा किया था कि इस पॉलिसी से पंजाब में कई सौ करोड़ रुपए अतिरिक्त रेवेन्यू आएगा और विज्ञापन माफिया की कमर टूट जाएगी।
लेकिन, आज इस पॉलिसी को लागू हुए पूरे 7 साल हो चुके हैं, और पंजाब का कोई भी शहर सिद्धू के दावों के आसपास भी नहीं पहुंच पाया। आंकड़े और वर्तमान स्थिति यह साफ संकेत दे रहे हैं कि पंजाब में हावी विज्ञापन माफिया ने इस पॉलिसी को पूरी तरह हाईजैक कर लिया है और इसे वास्तविक अर्थों में लागू ही नहीं होने दिया गया। जानकारी के अनुसार पॉलिसी के बाद उम्मीद थी कि शहरों में विज्ञापन स्थलों की ई-नीलामी, पारदर्शी सिस्टम और सख्त नियमों के चलते रेवेन्यू में भारी बढ़ौतरी होगी, लेकिन जमीनी हालात बिल्कुल उलट रहे। पंजाब के अधिकांश शहरों में विज्ञापनबाजी पर माफिया का कब्जा पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है और पॉलिसी केवल कागज़ी ईमानदारी तक सीमित होकर रह गई।
ख़ास बात यह भी है कि पंजाब की विज्ञापन पॉलिसी पर हमेशा से राजनीतिक सेट-अप हावी रहा है। कोई भी पार्टी सत्ता में आई हो, उसके कुछ चुनिंदा नेताओं ने विज्ञापनबाजी की आड़ में पैसा कमाने और माफिया को संरक्षण देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यही कारण है कि सिद्धांतों पर आधारित 2018 की यह पॉलिसी कभी भी सही ढंग से लागू नहीं हो सकी और रेवेन्यू बढ़ाने का सपना आज भी अधूरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक विज्ञापन माफिया और राजनीतिक हितों के गठजोड़ को तोड़ा नहीं जाता, तब तक न तो पॉलिसी में सुधार होगा और न ही शहरों को इसका आर्थिक लाभ मिल सकेगा। पंजाब के शहर आज भी उसी पुरानी व्यवस्था में फंसे हुए हैं, जहां सरकारी खजाना खाली और माफिया की जेबें भरी रहती हैं।
